अध्यक्ष पद पर कुर्सी खाली है… और संगठन में ‘नाम’ पर कुश्ती चालू है!

Ajay Gupta
Ajay Gupta

“कुर्सी खाली है, दावेदार लाइन में हैं और दिल्ली के गलियारे में सस्पेंस वैसा ही है जैसा IPL के फाइनल ओवर में होता है।”

भारतीय जनता पार्टी को नया राष्ट्रीय अध्यक्ष मिलना था फरवरी 2025 में… लेकिन अब जून भी जा रहा है और सिंहासन अभी भी खाली पड़ा है! संगठन और संघ के बीच मीटिंग पर मीटिंग हो रही है, लेकिन ‘नाम’ अब भी फाइनल नहीं हुआ। ऐसा लग रहा है जैसे कुर्सी कोई Game of Thrones हो गई हो, और हर गुट अपनी-अपनी रणनीति से बाज़ी मारने की फिराक में है।

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इधर जनता पूछ रही है—“कुर्सी पर कौन बैठेगा?”, उधर संगठन कह रहा है—“थोड़ा और इंतज़ार करो, अभी राजनीतिक पकवान में मसाले कम हैं!”

तो आइए जानें कि आखिर ये देरी क्यों हो रही है, कौन-कौन हैं कुर्सी के संभावित खिलाड़ी, और किसका सपना रह जाएगा अधूरा!

कुर्सी तो चाहिए… लेकिन “संगठनात्मक OTP” अभी तक नहीं आया!

भारतीय जनता पार्टी को नया राष्ट्रीय अध्यक्ष मिलना था फरवरी में, लेकिन अब जून भी जा रहा है और कुर्सी अभी भी खाली है। वजह? अभी तक 37 में से केवल 14 राज्यों में प्रदेश अध्यक्ष तय हो पाए हैं। जब तक 19 राज्य पूरे नहीं होंगे, भाजपा संविधान कहता है—“No कुर्सी For You!”

संघ बनाम संगठन: ‘नाम’ पर राय तो है, पर ‘रज़ामंदी’ नहीं

सूत्रों की मानें तो भाजपा और आरएसएस के बीच कुछ नामों पर अभी कुश्ती चल रही है। संघ चाहता है ऐसा चेहरा जो 2025 बिहार, 2026 बंगाल–तमिलनाडु और 2027 यूपी में जादू चला सके। लेकिन संगठन कह रहा है—”पहलवान तो चाहिए, लेकिन जरा सोशल इंजीनियरिंग भी देख लो भाई!”

कौन होगा अगला अध्यक्ष? कुर्सी के लिए लाइन में खड़े हैं ये नाम

  • सुनील बंसल – संगठन के गुप्त ब्रह्मास्त्र

  • शिवराज सिंह चौहान – अबकी बार पार्टी के मुखिया?

  • धर्मेंद्र प्रधान – संघ के करीबी और मोदी टीम के भरोसेमंद

  • वानति श्रीनिवासन/तमिलिसाई – साउथ में भगवा बिछाने की रणनीति

  • डी. पुरंदेश्वरी – एनटीआर की बेटी और आंध्र की बड़ी साख

“सब्र रखिए… मोदी जी विदेश से लौटें, फिर कुर्सी भी लौटेगी!”

खबरें हैं कि प्रधानमंत्री मोदी जुलाई के दूसरे हफ्ते में विदेश से लौटेंगे, और उसके बाद ही अध्यक्ष का नाम अनाउंस होगा। तब तक यूपी, महाराष्ट्र और बंगाल में भी प्रदेश अध्यक्ष तय किए जाएंगे। मतलब… “जैसे जैसे देश घूमते हैं मोदी जी, वैसे वैसे तय होते हैं कुर्सी के खिलाड़ी!

कुर्सी है पर खिलाड़ी नहीं!

संघ बोले: “हमें चाहिए खिलाड़ी, जो न हारता हो न थकता हो!”

संगठन बोला: “हमें चाहिए ऐसा जो ट्वीट भी करे और टीवी पर भी टिके!”

मोदी बोले: “मैं लौटकर आता हूं, तब तक तुम लड़ लो!”

विपक्ष बोला: “अरे भाई… ये तो कुर्सी का बिग बॉस चल रहा है!”

कुर्सी कब मिलेगी? जब संघ और संगठन कहेंगे—“अब ठीक है बेटा, अब तू बैठ!”

भाजपा की अगली बड़ी लड़ाइयों के लिए एक नया सेनापति तैयार हो रहा है… लेकिन फिलहाल तो संघ और संगठन में कुर्सी की मंथन जारी है।

जनता पूछ रही है—भाजपा में “हर काम टाइम पर” होता है, फिर अध्यक्ष का टाइम क्यों Pending है?

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